फिल्मों में सबसे शरीफ एक्टर की बात की जाए तो भारत भूषण उसमें पुरी तरह फिट बैठे थे बोलने चलने के अंदाज से लेकर कपड़ों तक उन्हें फिल्मी दुनिया के सबसे शरीफ और शालीन एक्टर का दर्ज मिला हुआ है।
फिल्मों में भारत भूषण की इमेज बहुत ही शरीफ आदमी की थी फैंस उनकी इसी इमेज के दीवाने थे 1954 के फिल्म चैतन्य महाप्रभु की सफलता के बाद वो कहानी बैठकर सिगरेट पी रहे थे वहीं उनका एक फैन था जो उन्हें सिगरेट पिता देख रहा था उसे यह बात पसंद ही नहीं आई फैन उनके पास गया और बोला आपके हाथ में सिगर देख कर अच्छा नहीं लगा जिसके बाद भारत भूषण ने कभी भी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया मेरठ में भारत भूषण अपने पिता की मर्जी के खिलाफ फिल्मों में आए और फिल्म बज्जू बरा से उन्हें सुपरस्टार बना दिया।
एक कैमरा भर कर कपड़े उनके कलेक्शन में हुआ करते थे मुंबई और पुणे में तीन आलीशान बेंगल और कोई एक लाख किताबें का कलेक्शन उनके दमदार एक्टिंग के कायल तो उसे वक्त पूरा देश हो गया 1958 के फिल्म फागुन में उन्होंने मधुबाला के साथ कम किया था दोनों की केमिस्ट्री लोगों को बहुत ही पसंद आई खबरें सामने आई थी की शूटिंग के दौरान भारत भूषण मधुबाला को पसंद करने लगे थे और शादी भी करना चाहते थे लेकिन मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी कर ली जिसके बाद भारत भूषण ने मेरठ के जमींदार की बेटी सरल से शादी कर ली एक्टिंग के बाद भारत भूषण अपने बड़े भाई के खाने पर प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाने लगे उनके प्रोड्यूस की गई ।
बस दो फिल्म में बसंत बाहर और बरसात की रात दोनों ही हिट रही फिर उन्होंने और भी फिल्में प्रोड्यूस की 1964 के फिल्म दूध का चंद में उन्होंने अपनी साड़ी जमा पूंजी लगा दी थी लेकिन फिल्म में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही अपने एक्टिंग करियर में इतनी सफलता देखने वाले भारत भूषण जब फिल्म प्रोड्यूसर बने तो कंगाली की खगर पर ए गए तीनों बेंगल किताबें तक उनकी पिग गई वो फ्लैट में रहने लगे और फिल्मों में साइड रोल भी करने लगे थे हालांकि इतने खराब हालात के बाद भी उन्होंने किसी के सामने हाथ तक नहीं फैलाई खबरें यह भी सामने आई की भारत भूषण आखरी समय में बस से जाते थे और उन्होंने गुजरे के लिए वॉचमैन की नौकरी भी की थी।
हालांकि इस बात को उनकी बेटी ने सरे से जानकारी दिया है और कहा की यह साड़ी बातें लेकिन हां पापा जी के पास आखरी समय में गाड़ियां नहीं थी लेकिन फिर भी उन्होंने कभी भी बस से ट्रैवल नहीं किया वो फिल्मों के सेट पर टैक्सी से जय करते थे जब कभी लेट हो जैन तो वो रिक्शा कर लिया करते थे 27 जनवरी 1952 को भारत भूषण का निधन हो गया था हालांकि उनकी बेटी का कहना है की उनके पिता का संस्कार बहुत ही अच्छे तरीके से हुआ था।