अमिताभ बच्चन की वजह से कंगाल बने थे सुनील दत्त..

बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के लेजंडरी अभिनेताओं में से एक है सुनील दत्त साहब । सुनील दत्त की शख्सियत एक बड़े सुपरस्टार के तौर पर रहेगी ।आज भले ही सुनील दत्त साहब हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनके किए गए किरदार आज भी लोगों के जहन में बैठे हुए। बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में जिस हिसाब से इनका करियर रहा है उसे देखने के बाद हर कोई इनका दीवाना हो जाता है। अपने शानदार फिल्मी सफर के दौरान उन्होंने बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।

सबसे पहले इन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक्टर के तौर पर की बाद में इन्होंने डायरेक्टर का काम भी शुरू किया और फिर बाद में प्रोडूसर भी बने। लगभग सभी फील्ड में सुनील दत्त साहब ने खूब लोकप्रियता बटोरी और हर कोई उनका दीवाना हो गया उनके फिल्मी सफर की तरह नजर डालें तो सुनील दत्त साहब ने अपने करियर की शुरुआत साल 1955 में आई फिल्म रेलवे प्लेटफार्म से की थी और बाद में उन्होंने पंजाबी फिल्म में भी अपना हाथ आजमाया 1978 में इन्होंने मन जिते जगत जित फिल्म की और फिर साल 1964 में इन्होंने डायरेक्शन की दुनिया में भी अपना कदम रखा। डायरेक्टर के तौर पर इन्होंने यादें फिल्म डायरेक्टर जो कि काफी बड़ी हिट साबित हुई फिर प्रोड्यूसर बन कर इन्होंने मन का मीत जो कि जो साल 1968 में आई थी।

सुनील दत्त की अगर आखिरी फिल्म की बात कर तो लगे रहो मुन्ना भाई जो कि साल 2006 में आई थी उनकी आखिरी फिल्म थी। लेकिन सुनील दत्त साहब की शख्सियत काफी ऊंचे दर्जे की रही है। इन्होंने अपने से छोटे कलाकारों को आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया है। सुनील दत्त साहब की यही शख्सियत उन्हें और भी खास अभिनेता बनाती है।

सुनील दत्त ने वैसे कई सारे स्टार बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री को दिए हैं और ऐसे में अगर मैं आपको यह भी कहूंगा कि सुनील दत्त की बदोलत से ही आज अमिताभ बच्चन इतने बड़े महानायक बन पाए हैं तो इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। भले ही बच्चन परिवार की नज़दीकियां उस समय कि मौजूदा प्राइम मिनिस्टर गांधी परिवार के साथ रही थी लेकिन बावजूद इसके फिल्मों के स्ट्रगल करना अमिताभ बच्चन के लिए भी काफी मुश्किलों भरा रहा। अब गांधी परिवार के रसूख की वजह से अमिताब बच्चन को अपनी पहली फिल्म साथी हिंदुस्तानी तो मिल गई थी लेकिन बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा ब्रेक उन्हे सुनील दत्त साहब की वजह से ही मिला था और इसकी शुरुआत साल 1967 से होती है।

दरअसल हुआ यूं कि साल 1968 में टाइम्स ग्रुप की मैगजीन माधुरी ने एक देशव्यापी टैलेंट हंट का आयोजन किया था। जिसके लिए कोलकाता में रह रहे अमिताभ बच्चन ने भी अपनी तस्वीरें भेजी थी। अमिताभ बच्चन की कद-काठी और उनका रंग रूप देखने के बाद उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। यह रिएक्शन बच्चन फैमिली को इतनी ज्यादा बुरा लगा था कि बिग बी की मां तेजी बच्चन इसकी शिकायत लेकर अपने दोस्त इंदिरा गांधी तक पहुंच गई जो समय देश की प्रधानमंत्री हुआ करती थे। अब इंदिरा गांधी ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा और बताया जाता है कि उन्होंने अभिनेत्री नरगिस को फोन कर मामले को देखने को कहा। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री होने के नाते अगर सीधे तौर पर अमिताभ बच्चन को लेकर वह कोई बड़ा फैसला लेती तो उनकी शख्सियत पर बुरा असर पड़ता लेकिन वहीं दूसरी ओर नरगिस भी इस मामले में क्या कर सकती थी। वह भी बेबस थी और उन्होंने इंदिरा गांधी से कहा कि अगर तेजी का बेटा फिल्मों में काम करना चाहता है तो मुंबई भेज दे वो उनकी की मदद करेंगे। इस तरह अमिताभ बच्चन कोलकाता से मुंबई आ गए। अब अमिताभ बच्चन मुंबई तो आ गए थे और मुंबई में अमिताभ बच्चन को काम दिलवाने की जिम्मेदारी अब दत्त परिवार की थी। सुनील तो उस समय काफी ज्यादा लाइमलाइट में बन गए थे, और बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में उनकी अच्छी खासी पहचान भी हुआ करती थी। इसलिए नरगिस और सुनील दत्त अमिताभ बच्चन का फोटो लेकर अपने दोस्तों निर्माता-निर्देशकों के दफ्तरों के चक्कर काटने लगे। नरगिस ने बीआर चोपड़ा, राजश्री के मालिक ताराचंद बड़जात्या सहित अमिताभ बच्चन के लिए कई सिफारिशें की। लेकिन इन दोनों ही बड़े निर्माता-निर्देशकों ने अमिताभ बच्चन की कद-काठी और उनकी शक्ल सूरत देखने के बाद उन्हें रिजेक्ट कर दिया। अब इतने रिजेक्शन देखने के बाद अमिताभ बच्चन तो मायूस थे लेकिन उनसे ज्यादा मायूस थी नरगिस।

एक तो देश के पीएम का प्रेशर और दूसरा उनकी अपनी निजी साख भी दांव पर लगी हुई थी। जब कोई अमिताभ बच्चन को काम देने को तैयार नहीं हुआ तो सुनील दत्त साहब ने एक बड़ा फैसला लिया। उस समय सुनील दत्त साहब के पास इतने ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद अमिताभ बच्चन के लिए उन्होंने जो किया वो शायद ही कोई और कर सकता था। दत्त परिवार ने उस समय एक बड़ी फिल्म का निर्माण करने का सोचा, जिस फिल्म का नाम था रेशमा और शेरा जिसमें अमिताभ बच्चन को गूंगे का रोल दे दिया। वहीं दूसरी ओर इसी बीच उन्हें इंदिरा गांधी की सिफारिश पर अमिताभ बच्च को फिल्म सात हिंदुस्तानी में छोटा सा रोल मिल गया यह फिल्म रेशमा और शेरा से पहले रिलीज हुई। इसलिए इसे अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म माना गया, लेकिन दत्त परिवार ने अमिताभ बच्चन के लिए रेशमा और शेरा जैसी बड़ी फिल्म का निर्माण किया है। दत्त साहब ने फिल्म अमिताभ के लिए बनाई थी इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल हुआ और सुनील दत्त पूरी तरीके से बर्बाद हो गए।

रेशमा और शेरा फिल्म में संजय दत्त की भी छोटी सी भूमिका देखने को मिलेगी। फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन बहुत ही बुरा रहा जिसके चलते सुनील साहब को अपना बंगला बेचने की नौबत तक आ गई। लेकिन खैर जैसे-तैसे सुनील साहब ने इस मामले को पूरी तरीके से हैंडल कर लिया और दिवालिया होते हुए भी अमिताभ बच्चन के लिए इतना बड़ा काम कर दिया जो कि शायद ही कोई कर सकता था। बाद में आने वाले समय में सुनील दत्त साहब ने कई सिफारिशें की और अमिताभ बच्चन को छोटे-छोटे रोल दिलवाते गए।

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