साल था 1968 हिंदी सिनेमा अपनी बुलंदियों पर था और इसी दौर में दो अजनबी जो बाद में एक दूसरे के लिए सब कुछ बन गए वह थे गुलजार और राखी राखी बंगाल से आई थी सपनों की नगरी मुंबई में अपनी जगह बनाने खूबसूरत मासूम लेकिन बेहद मजबूत वहीं गुलजार पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद थे.
वह एक बेहतरीन कवि गीतकार और लेखक हैं उनकी पहली मुलाकात साधण थी लेकिन दोनों के दिलों में एक हलचल छोड़ गई थी धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ी और फिर प्यार में बदल गई 5 साल की मुलाकातों और करीबियों के बाद दोनों ने शादी कर ली बॉलीवुड की एक बड़ी शादी थी जिसमें बड़े-बड़े स्टार शामिल हुए थे.
इस शादी में सुनील दत्त राखी के भाई बने एसडी बर्मन और जीपी सिप्पी ने इस रिश्ते को अपना आशीर्वाद दिया सबको लगा था कि यह जोड़ी बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक होगी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था शादी के कुछ महीनों बाद ही मेघना गुलजार का जन्म हुआ इस खुशी के बावजूद राखी और गुलजार के रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगी राखी फिल्मों में काम करना चाहती थी.
लेकिन गुलजार को यह कतई मंजूर नहीं था उन्हें लगता था कि मां बनने के बाद राखी को फैमिली पर फोकस करना चाहिए राखी के लिए एक्टिंग सिर्फ करियर नहीं था वो उनकी पहचान भी थी साल था 1974 जब गुलजार आधी फिल्म बना रहे थी इसी दौरान यश चौपड़ा ने राखी को अपनी फिल्म कभी-कभी में कास्ट करने का ऑफर दिया राखी ने कभी-कभी फिल्म साइन कर ली जिसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ नजर आई यह बात गुलजार को कतई पसंद नहीं आई रात को जब राखी शूटिंग से घर लौटी तो दोनों के बीच बहस हो गई कहा जाता है कि बहस इतनी बड़ी कि गुलजार का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने राख के साथ बुरा हाल कर दीया लेकिन यह कहानी का सिर्फ एक पहलू है इस घटना को लेकर कई कहानियां चलती हैं।
लेकिन किसी के पास इसका पक्का सबूत नहीं है राखी और गुलजार दोनों ने कभी इस बारे में खुलकर बात नहीं की लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना के बाद राखी ने फैसला कर लिया कि व गुलजार के साथ नहीं रहेंगी राखी और गुलजार ने कभी तलाक नहीं लिया लेकिन वो फिर कभी एक साथ नहीं रहे दोनों ने अपनी बेटी मेघना गुलजार की परवरिश के लिए एक सम्मानजनक दूरी बनाए रखी गुलजार ने कई बार अपनी शायरी और गीतों में अपनी अधूरी मोहब्बत को बयां किया है राखी ने भी कभी गुलजार के खिलाफ कुछ नहीं।
कहा गुलजार की यह पंक्तियां उनके दिल का हाल बयां करती हैं तुम चले जाओगे तो सोचेंगे हमने क्या खो दिया हमने क्या पा लिया शायद उनका रिश्ता ऐसा ही था कभी बहुत करीब तो कभी भी बहुत दूर आपको क्या लगता है गुलजार और राखी का रिश्ता किसी गलतफहमी का शिकार हुआ या फिर यह सिर्फ किस्मत का खेल था कि दोनों को अलग होना पड़ा।